Sunday, November 28, 2021
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भारत के प्रसिद्ध मंदिर, उनकी स्थापना और स्थापक | India famous temple, Bharat ke prasiddh mandir in Hindi

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India famous temple, Bharat ke prasiddh mandir in Hindi वैसे भारत की सभ्यता सबसे प्राचीन और प्रसिद्ध है। भारत की प्रसिद्धियों के बारे में बहुत सारे ग्रंथो और पुराणों में लिखा गया है। कहा जाता है अपना इंडिया देवताओं का जन्म भूमि है तो जरुर उन देवी देवताओं का पूजनीय स्थल यानि मंदिर भी अपने भारत में ही होंगे। वैसे अपना भारत बहुत सारे धर्मो से भरा पड़ा है जैसे हिंदू धर्म, बौद्ध धर्म, जैन धर्म, इस्लाम धर्म और सिख धर्म सहित और विश्व के कई धर्मो के लोग यहाँ निवास करते हैं।

सबके अपने- अपने धार्मिक स्थल है। यहाँ पर हिन्दू धर्म पूजनीय माना गया है। हिन्दू धर्मो के कई सारे मंदिर भारत में हैं। कई दशको से अलग – अलग देवी देवताओं के मूर्ती को पूजा जा रहा है। उनके कर्मो को सराहा जा रहा है।

मंदिरों के विशेष उनके विस्तृत वास्त़ुकला और समृद्ध इतिहास को लेकर सम्पूर्ण संसार में चर्चा का विषय रहा है। हमारी संस्कृति, आत्मविश्वास, अध्यात्मिकता, वस्तुकलायें, पुरषार्थ, वीरता, प्रेम और सभ्यताओं के सौन्दर्य को प्रदर्शित करने वाले हजारों की संख्या में मंदिरों का गुणगान है।

लेकिन आज मैं आप को भारत के प्रसिद्ध मंदिर के बारे में बताऊंगा और उनके संस्थापना एवं संस्थापक की जानकारी भी आप को इस पोस्ट के माध्यम से प्रदान करूँगा।

Table of Contents

1. श्री राम मंदिर, अयोध्या 

धामों में धाम अयोध्या धाम, पुरुषोत्तम भगवान श्री राम चन्द्र जी का पूज्य जन्म स्थल अयोध्या में उनके भव्य मंदिर का निर्माण किया जा रहा है यानि राम मंदिर बनने की तैयारियां शुरू हैं। मैंने इसे सर्वप्रथम इसलिए रखा की कि यह धर्म व जमीन के विवादों से घिरा हुआ था।

लेकिन जल्द ही सुप्रीम कोर्ट ने 9 नवम्बर 2019 को फैसला सुनाया और हिन्दू धर्म में श्री राम को बहुत ही बड़ा महत्व का दर्जा दिया गया है यही कारण से हमने इसे सबसे पहले रखा। वैसे यह हिन्दू – मुस्लिम विवाद से जुड़ा था। इसकी स्थापना सन 1991 में राजीव गांधी के सरकार कार्यकाल में रोक दिया गया था।

राम मंदिर और बाबरी मस्जिद दोनों के हो होने दावे एक ही जगह पर अलग अलग धर्मो के लो से बताया जा रहा था अपितु सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सब साफ़ हो गया। अब इसका पुनर्निर्माण उत्तर प्रदेश के मानवीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ (अजय सिंह) द्वारा 25 मई को भूमि पूजन के रूप में किया गया है। आगे चल कर यह एक भव्य मंदिर बनेगा और लोगो के लिए दर्शन और पर्यटन स्थल का महत्त्व जगह बन जायेगा। अगर जो आप श्री राम मंदिर से धन्नीपुर में बनने वाला बाबरी मस्जिद तक सड़क मार्ग दिखाये के बारे में देखना चाहते हैं तो कमेंट जरुर करें

स्थापित देवता-  श्री राम 
स्थान- अयोध्या, उत्तर प्रदेश 
स्थापक- योगी आदित्यनाथ 
स्थापित समय-  25 मई 2020

2. श्री वैष्णो देवी मंदिर, जम्मू 

वैसे तो भारतीय व्यक्ति को माँ वैष्णो देवी के मंदिर का परिचय नहीं कराना पड़ेगा, बल्कि देश विदेश के लोगो के लिए यह एक पर्यटन स्थल भी है। यहाँ लोग भरी तादात में आते हैं। यह मंदिर समुन्द्र तल से 15 किलोमीटर उचाई पर त्रिकुटा नामक पर्वत पर बसा है।

यह मंदिर 108 शक्तिपीठों में से एक है जिससे तक़रीबन 13 किलोमीटर दूर से पैदल रास्ता तय करते हुए श्रद्धालू को एक छोटे से गुफा तक जाना पड़ता है। वैष्णो देवी को माता रानी के नाम से लोग संबोधित करते है। लोग पैदल यात्रा करते हुए एक बड़े ही मनमोहक नारे के साथ आगे बड़ते है। चलो बुलावा आया है माता रानी ने बुलाया है। 

हिन्दू कथा पुराणों के द्वारा पता चलता है की भगवान् विष्णु के आदेशनुसार माँ लक्ष्मी, माँ सरस्वती और माँ पार्वती के शक्ति से उत्पन्न हई इस देवी को वैष्णो नाम दिया गया। माता रानी ने भैरव नाम के घोर अत्याचारी राक्षस का वध किया था और उसका गला काटने के बाद उसने माँ कह कर हजारों बार माता रानी को संबोधित किया और माता ने उसे आशीर्वाद दिया की तुम्हारी पूजा के बिना मेरी पूजा और दर्शन अधूरा रहेगा।

स्थापित देवी-  माता वैष्णो देवी
स्थान- त्रिकुटा, जम्मू 
स्थापक- पंडित श्रीधर
स्थापित समय-  1300 ई०स०पू० में

3. त्रिरूपति बालाजी, तिरुपति

आपको जानकार आश्चर्य होगा कि यह मंदिर दुनिया के सबसे अमीर मंदिर में से एक है। विश्व का सबसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थल तिरुपति बालाजी तिरुमाला नमक पहाड़ियों के बीच बसा हुआ है। श्री वेंकटेश्वर के नाम से भी इस मंदिर को भी लोग जानते हैं। माना जाता है की यह सात चोटियों से घिरा अद्भुत स्थल भगवन आदिशेष के सात सिरों का प्रतिनिधित्व करती हैं।

इसकी सातवी चोटी वेंकटाद्री नाम से जाना जाता है यही कारण है की इस मंदिर को वेंकटेश्वर के नाम से भी लोग जानते है। कहा जाता है कि मंदिर भगवान वेंकटेश्‍वर स्‍वामी की मूर्ति पर लगे बाल असली हैं। जो हमेश मुलायम रहते हैं। देवस्थानम नामक एक विशेष मार्ग बनाया गया है जिसे पैदल यात्री जो जाने में आसानी होती है।

कहा जाता है दर्शनार्थी की मनसा पुरी होती है तो वह अपने बालो को बालाजी में समर्पित करता है तथा भारी मात्रा में लोग यहाँ अपने श्रद्धा के हिसाब से सोना चांदी भी भगवन के श्री चरणों में समर्पित करते हैं। इस मंदिर की उचाई 853 मीटर है। मंदिरके मुख्य द्वार को गोपुरम नाम से जाना जाता है।

स्थापित देवता-  श्री वेंकटेश्वर(विष्णु)
स्थान- चित्तूर, आन्ध्र प्रदेश 
स्थापक- अज्ञात 
स्थापित समय-  युगों उपरांत

4. काशी विश्वनाथ मंदिर, वाराणसी

भगवान् भोले नाथ का प्रिय स्थान वनारस में स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर जो पवित्र गंगा के पश्चिम तट पर स्थित है। यह हिन्दू धर्म में भगवान् शिव का सबसे लोकप्रिय मंदिर माना जाता है। वनारस के मध्य स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर लाखों हिन्दुओ के श्रद्धा का केंद्र है।

सम्पूर्ण ज्योतिर्लिंगों में से भगवन शिव का यह 12वा ज्योतिर्लिंग है। जिन्हें विश्वनाथ या विश्वेश्वर के नाम से परचित किया गया। कहा जाता है काशी नरेश महाशिवरात्री के दिन यहाँ पूजा अर्चना करने आते हैं और उस समय काल में किसी और का मंदिर में प्रवेश वर्जित कर दिया जाता है।

इस मंदिर के अंतर्गत अविमुक्तेश्वर, विष्णु, गौरी, विरुपक्ष ,विनायक और कालभैरव के भी मंदिर स्थापित हैं। लोगो की मान्यता है की मरे हुए व्यक्ति की अस्थियाँ अगर काशी के गंगा में प्रवाह किया जाये तो उनकी आत्मा को शांति मिलती है। और वो परम वैकुण्ठ को प्राप्ती कर लेते हैं। यहाँ भरी मात्र में पण्डे अपना मठ बना के रहते हैं और श्राद आदि करते हैं।

स्थापित देवता-  भगवान् शिव 
स्थान- वाराणसी, उत्तर प्रदेश 
स्थापक- मराठा शासक, इंदौर की अहिल्या बाई होल्कर
स्थापित समय-  1780

5. स्वर्ण मंदिर, अमृतसर

भारतीय इतिहास के सबसे आध्यात्मिक जगहों में से एक है यह गोल्डन टेम्पल। इस स्वर्ण मंदिर को हरमिंदर साहब के नाम से जाना जाता है। विध्वंस के मार से गुजरने के तत्पश्यत, 1830 में महाराजा रणजीत सिंह के नेत्रित्व में यह बनाया गया।

इससे बनाने के लिए सोना तथा संगमर के पत्थरों का प्रयोग किया गया। सिख धर्म में विशेष धर्म स्थल है अमृतसर का स्वर्ण महल। इस स्वर्ण मंदिर के अन्दर एक तालाब है जिसकी एक अलग ही मान्यता है।यहाँ देश विदेश से लोग घुमने आते हैं। इस मंदिर का एक और खास बात है, यहाँ रोज लाखो लोगो को मुफ्त में भोजन कराया जाता है। जिसमे रोटी और घी का बड़ा महत्व होता है और इसे भरी मात्र में उपलब्ध करा जाता है।

स्थापित व्यक्तिव – हरमिंदर साहब
स्थान- अमृतसर, पंजाब
स्थापक- महाराजा रणजीत सिंह
स्थापित समय-  1830

6. अमरनाथ गुफा, जम्मू-कश्मीर

बाबा वर्फानी के भक्तो के लिए यह दर्शन स्थल विशेष रूप का महत्व देता है भारत में। दुनिया भर के श्रद्धालु इस अमरनाथ यात्रा में सम्मलित होकर यहाँ जम्मू-कश्मीर में स्थित अमरनाथ गुफा में आते है। श्रीनगर से 141 किमी दूर तथा 3888 मीटर उचाई पर स्थित यह अमरनाथ मंदिर विश्व स्तर पर प्रसिद्धी पा चूका है।

इस गुफा की उचाई 19 मीटर और चौड़ाई 16 मीटर है। सम्पूर्ण साल यह गुफा वर्फ से ढका रहता है। कहा जाता है सावन के महीने में यहाँ वर्फ का शिवलिंग खुद से उत्प्पन होता है या बनता है। उसी शिवलिग का दर्शन करने लोग लाखो की संख्या में आते हैं। लोग अपने साथ कवर लाते हैं और उसमे गंगा जल भर लेते हैं जो शिव को अर्पित करते हैं।

लोगो का मानना है कि तीर्थों में तीर्थ अमरनाथ है। हिन्दू पुराण और ग्रंथो की माने तो ऐसा कहा जाता है भगवान् शिव जी ने माता पार्वती को यही पर जीवन और मृत्यु के बारे में कथा सुनाई थी जिसे शुख्देव ने पुर जन्म में तोते के रूप में सुन लिया था।

स्थापित देवता-  बाबा बर्फानी (भगवान शिव)
स्थान- श्रीनगर, जम्मू-कश्मीर 
स्थापक- अज्ञात 
स्थापित समय-  युगों उपरांत



7. केदारनाथ मंदिर, उत्तराखण्ड

केदारनाथ का मंदिर भी भगवां भोले नाथ का ही मंदिर है। रूद्र प्रयाग जनपद में स्थित हिमालय के गढ़वाल पर्वतमाला पर स्थित केदारनाथ धाम, हिन्दू के पवित्र धामों में पूजनीय है। भगवान् भोलेनाथ के 12वे ज्योतिर्लिंगों में से सबसे ऊँचा ज्योतिर्लिंग है।

भगवान् भोले नाथ का मंदिर 3583 मीटर उचाई के पर्वत श्रंखला पर स्थापित है। इसमें गंगोत्री, यमुनोत्री और केदारनाथ के अलावा छोटा चार धाम में भी शामिल किया गया है। इस मंदिर का निर्माण राक्षसों के कुल गुरु शंकराचार्य द्वारा किया गया था। यह पंडो के द्वारा स्थपित किया गया था जो उस समय वहां के मूल निवासी हुआ करते थे।

वर्फीली चमकती पहाड़ो से घिरा हुआ यह केदारनाथ मंदिर आध्यात्मिक सुन्दरता को चार चाँद लगा देता है। यहाँ के पहाडी ढलानों पर लोग चढ़ाई करके दर्शन करने जाते हैं। यहाँ यात्रा के लिए किराये पर पहाड़ी घोड़े भी इस्तेमाल में लाये जाते हैं।

स्थापित देवता-  भगवान शिव
स्थान- रूद्रप्रयाग, उत्तराखण्ड 
स्थापक- पाण्डव वंश के जनमेजय आदि शंकराचार्य
स्थापित समय-  8वी शताब्दी

8. बद्रीनाथ मंदिर, उत्तराखण्ड

उत्तराखण्ड के चमोली जनपद में अलकनन्दा नदी के तट पर स्थित बद्रीनाथ मंदिर, हिन्दू पूज्य स्थल है। गडवाल पहाडी पर स्थित यह एक विष्णु मंदिर है। यह मंदिर समुद्रतट से 3133 मीटर ऊंचाई पर स्थित है। ठंडक के मौसम में हिमालयी क्षेत्र की रूक्ष मौसमी दशाओं के कारण मन्दिर वर्ष के छह महीनों (अप्रैल के अंत से लेकर नवम्बर की शुरुआत तक) की सीमित अवधि के लिए ही खुला रहता है।

बद्रीनाथ के इस मंदिर में भगवान् विष्णु के अवतार बद्रीनारायण जी को पूजा जाता है। भगवान् बद्रीनाथ की मूर्ती शिलीग्राम से बनी है जो 1 मीटर से भी लम्बी है। 7 वी शताब्दी में आदि गुरु शंकराचार्य ने नारद कुण्ड से निकलकर इसकी स्थापना किया था। ऋषिकेश से उत्तर दिशा में 174 किलोमीटर की दुरी पर यह मंदिर सिथित है।

स्थापित देवता-  भगवान बद्रीनारायण
स्थान- चमोली, उत्तराखण्ड 
स्थापक- आदि गुरु शंकराचार्य
स्थापित समय-  7वी शताब्दी

9. श्री जगन्नाथ पुरी मंदिर, पुरी

भारत के पुरी नामक शहर में स्थित है यह पवित्र मंदिर जगन्नाथ पुरी। महाराजा इंद्रद्युम्न के नेत्रित्व में यह मंदिर 11वी शताब्दी निर्मित किया गया। भगवान् श्री जगन्नाथ जी श्री हरी विष्णु जी के ही अवतार थे। हिन्दू धर्म के चारो धामों में इसकी भी मान्यता है जिसमे बद्रीनाथ, द्वारका और रामेश्वरम के साथ – साथ इसकी भी गणना की जाती है।

यह हिन्दुओ के पवित्र स्थलों में बहुत ही लुभावना और विदेशी पर्यटन स्थल के लिए भी मशहूर है। यहाँ भगवान् श्री जगन्नाथ जी की रथयात्रा बड़ी ही धूमधाम से निकली जाती है। रथ यात्रा के दौरान यात्री को माहोल बहुत रंगीन और उदगम भरा हो जाता है। पूरा पुरी हर्षो उल्लास से प्रपग्य हो जाता है। आप को बता दे कि श्री कृष्ण को ही जगन्नाथ भगवान् कहा जाता है।

स्थापित देवता- भगवान जगन्नाथ (श्रीकृष्ण)
स्थान- पुरी, उड़ीसा
स्थापक या पुन: निर्माता- गंगा वंश के राजा अनंतवर्मन चोडगंगा
स्थापित समय-  12वी शताब्दी

10. महाकालेश्वर मंदिर, उज्जैन 

देवो के देव महादेव के महिमा का एक और बखान मध्य प्रदेश के उज्जैन नामक प्राचीन शहर में स्थित रूद्र सागर झील के समीप यह मंदिर बना हुआ है। भगवान् भोलेनाथ के १२ ज्योतिर्लिंगों में से यह भी एक है। यहाँ मंदिर में भष्म आरती और अनुष्टान जैसे कही समारोह किये जाते है।

यहाँ प्रत्येक वर्ष कई धार्मिक त्यौहार और मेले का उत्सव किया जाता है। जिसे देखने के लिए बहुत दूर-दूर से लोग आते हैं। कहा जाता है कि महाकवि कलिदास ने मेघदूत को उदगम करते हुए हुए इस मन्दिर की बहुत प्रसंशा की थी। मराठों के शासनकाल में यहाँ दो प्रकार की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ घटीं थी  – पहला, महाकालेश्वर मंदिर का पुनिर्नर्माण हुआ था और  दूसरा ज्योतिर्लिंग की पुनर्प्रतिष्ठा की गयी थी तथा सिंहस्थ पर्व स्नान की स्थापना भी हुआ था, जो एक बहुत बड़ी उपलब्धि थी।

स्थापित देवता-  भगवान शिव
स्थान- उज्जैन, मध्यप्रदेश 
स्थापक- स्वयंभू; जीर्णोद्धारक उज्जैन शासक/मराठा+राजा भोज
स्थापित समय- अति प्राचीन




11. सोमनाथ मंदिर, गुजरात

 

सोमनाथ मंदिर का इतिहास बहुत प्राचीन और एतिहासिक है। सोमनाथ मंदिर हिन्दुओ के महत्वपूर्ण मंदिरों में से एक है। सोमनाथ मंदिर में भगवान् शिव शंकर के शिवलिंग की पूजा की जाती है। सोमनाथ गुजरात के सौराष्ट्र जिले के बेरवाल नामक बंदरगाह स्थान पर स्थित है। सोमनाथ मंदिर विश्व के प्रसिद्ध धार्मिक तथा पर्यटन स्थलों में से एक है।

सोमनाथ मंदिर आज भी भारत के 12 ज्योतिर्लिंग में सर्बप्रथम ज्योतिर्लिंग में से एक माना जाता है। सोमनाथ मंदिर हिन्दू धर्म के उत्थान-पतन का सबसे बड़ा प्रतिक रहा है।सोमनाथ मंदिर कई बार टूटा और कई बार इसका पुनर्निर्माण किया गया है। वर्तमान समय में जो मंदिर (सोमनाथ) है। इसका पुनर्निर्माण भारत के स्वतंत्रता के पश्चात सरदार बल्लभ भाई पटेल के द्वारा करवाया गया था।

स्थापित देवता-  भगवान शिव
स्थान- सौराष्ट्र, गुजरात
स्थापक- अज्ञात
स्थापित समय-अति प्राचीन 

12. बैधनाथ धाम, देवघर

भगवान् भोले नाथ के मंदिर बैधनाथ मंदिर को बैधनाथ धाम के नाम से भी संबोधित किया जाता है। भगवान् शिव के १२ ज्योतिर्लिंग में भगवान् शिव का सबसे प्रिय स्थान माना जाता है बैधनाथ धाम। संथाल परगना विभाग के देवघर झारखण्ड राज्य में स्थित है। हिन्दू  ग्रंथो में भी इस मंदिर का काफी विस्तार से उल्लेख किया गया है।

हमारे रामायण की अगर माने तो कहा जाता है कि लंका का राजा रावण यहाँ अपनी पूजा करता था। बड़ा ही दिलचस्प कथा है इस मंदिर का, कहा जाता है एक बार रावण ने भगवान् शंकर की पूजा कर के उन्हें खुश कर दिया और उन्हें अपने लंका लोक ले जाने की आग्रह किया। भगवान् उसकी पूजा से खुश थे इसी लिए उन्होंने अपना शिवलिग दे दिया। और साथ में एक चेतवानी भी दिया की अगर रास्ते में तुम कही भी इस ज्योतिर्लिंग को रख दोगे तो वही पर यह स्थापित हो जायेगा।

रावण मान गया और ज्योतिर्लिंग को लेकर चल दिया। रावण को रास्ते में लघुसंका की तलब लगी और वह अपने विमान से नीचे उतरा, उसने देखा की वहाँ एक ग्वाला गया चारा रहा था। रावण ने उससे ज्योतिर्लिंग देकर कुछ समय के लिए रुकने को बोला। उसी ग्वाला का नाम बैजू था। बैजू ज्योतिर्लिंग लिए- लिए थक गया और मजबूर होकर रख दिया, उसी समय रावण आ गया और देख कर्ट बहुत दुखी हुआ फिर ज्योतिर्लिंग को वही छोड़ का चल गया।

अब बैजू मरे दुःख के रोजाना वहाँ आता और ज्योतिर्लिंग को दो चार डंडे लगा कर जाता। इसी प्रकार वह अपना गुस्सा रोजाना व्यक्त करता था। एक दिन की बात है  बैजू भूल गया था लेकिन जब वह खाने बैठा तो उससे याद आया और अपना भोजन छोड़ कर लंडे लगाने आ गया ज्योतिर्लिंग को जिससे भगवान् भोले नाथ खुश होकर उससे बरदान दिया और कहा आज से इस जगह का नाम तुम्हारे नाम से जाना जायेगा। तभी से उस जगह का नाम बैजनाथ धाम से जाना जाता है।

स्थापित देवता-  बैजनाथ (भगवान शिव)
स्थान- देवघर, झारखण्ड
स्थापक- बैजू ग्वाला
स्थापित समय-अति प्राचीन 

13. सिद्धि विनायक मंदिर, मुंबई

सिद्धि विनायक मंदिर भारत के उन प्रसिद्ध मंदिरों मे से एक है जो काफी नामी और चर्चित है। यह मंदिर  महाराष्ट्र राज्य के राजधानी मुंबई के दादर नामक शहर में स्थित है। सिद्धि विनायक मंदिर में भगवान् श्री गणेश की पूजा होती है।

जिन प्रतिमाओं या मूर्तियों में भगवान् श्री गणेश जी की सूड दायीं तरफ मुड़ी हो वे मूर्तियाँ सिद्ध्पीठसे जुड़ी हुई होती है और वे मंदिर सिद्धि विनायक मंदिर के नाम से जाने जाते है या पहचाने जाते हैं।सिद्धि विनायक मंदिर जाने वाले भक्तो का कहना है कि वहां जाने से मन को शांति मिलती है और वहां पर कोई मन्नत मांगने पर वो माँगा हुआ मन्नत अति कम समय में पूर्ण हो जाता है।

सिद्धी विनायक मंदिर के अन्दर एक छोटे से मंडप में श्री गणेश जी की मूर्ती स्थापित हुई है। सिद्धि विनायक मंदिर  में गणपति जी का दर्शन करने के लिए देश के कोने-कोने से अनेक धर्म-जाति के लोग आते हैं। 

स्थापित देवता- श्री गणेश
स्थान- मुंबई (दादर), महाराष्ट्र
स्थापक-बिट्ठू और देउबाई
स्थापित समय-सन 1801 ई० में 

14. श्री साईं बाबा मंदिर, शिरडी

सबसे पहले हम बात करेंगे श्री साईं बाबा मंदिर कहाँ है?  यह मंदिर महाराष्ट्र राज्य के अहमदनगर जिले के शिरडी नामक शहर में स्थति है। श्री साईं बाबा मंदिर भारत के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। इसकी ख्याति भारत देश के कोने-कोने में फैली हुई है।

साईं बाबा का पूरा जीवन काल शिरडी में ही व्यतीत हुआ और साईं बाबा अपने जिवनोप्रांत कई कल्याणकारी कार्य किये और कहा जाता है कि साईं बाबा एक साधारण आदमी ही थे। लेकिन साईं बाबा के अन्दर वो सभी गुण बिद्दमान थे जो हमारे प्रभु श्री राम,श्री हरी बिष्णु आदि देवताओं के अन्दर बिद्दमान थे।

इस वजह से हम और हमारे देश के हिन्दू धर्म के लोग साईं बाबा को भगवान् का एक रूप मानते हैं। और इनकी पूजा करते हैं।वैसे यह एक इस्लामिक धर्म से थे लेकिन इनके कर्म और उपदेश केवल मानव हित के लिए हुआ करते थे। बाबा जी किसी भी धर्म को बढावा नहीं देते थे और न किसी का अपमान करते थे  इसका एक प्रसिद्ध तकियाकलाम था “सबका मालिक एक”। 

स्थापित देवता-  श्री साईं बाबा 
स्थान- शिरडी, महाराष्ट्र 
स्थापक-धर्मप्रसाद अग्रवाल  
स्थापित समय- सन 1922 ई० में 

15. श्री रामेश्वरम मंदिर, तमिलनाडु

रामेश्वरम मंदिर भारत के तमिलनाडु राज्य के रामनाथपुरम जिले में स्थित है। रामेश्वरम मंदिर का निर्माण लंका के राजा परम वीर, परमबाहु जीर्ड़ोद्धारक (रामनाथ पुरम के राजा ) उडैयान सेतुपति ने निर्मित करवाया था। रामेश्वरम मंदिर में भगवान् शिव की पूजा होती है जो प्रभु श्री राम ने स्थापित किये थे।

श्री रामेश्वरम मंदिर हिन्द महासागर और बंगाल की खाड़ी  से चारों ओर से घिरा हुआ है और यह मंदिर हिन्द महासागर और बंगाल की खाड़ी से चारो ओर से घिरे होने के कारण यह मंदिर एक टापू पर बसा या स्थिति हुआ दिखाई देता है। यहाँ का दृश्य देखने में लुभावना और मनमोहक लगता है। लंका पर चढ़ाई करने के लिए भगवान् श्री राम ने सेतु का निर्माण करवा और लंका के राजा को हराकर विजय प्राप्त किया।

फिर बाद में श्री राम ने विभीषण के अनुरोध पर धनुषकोटि नामक स्थान पर यह सेतु को तोड़ दिया था। आज भी इस 30 मील (48 कि।मी) लंबे आदि-सेतु के अवशेष सागर में दिखाई देते हैं। यहां के मंदिर के तीसरे प्रकार का गलियारा दुनिया का सबसे लंबा गलियारा है। रामेश्वरम मंदिर हिन्दू धर्म के चार धाम तीर्थ में से एक है। यह मंदिर लगभग 6 (छह) हेक्टेयर भू-भाग में फैला हुआ है ।इस मंदिर की प्रमुख द्वार लगभग 39 मिटर ऊंचाई तक बना हुआ है। कहा जाता है “रामेश्वरम अर्थात राम के ईश्वर”

स्थापित देवता-  भगवान शिव
स्थान- तमिलनाडू ,रामनाथ पुरम
स्थापक- राजा उडैयान सेतुपति
स्थापित समय-1173 ई० में  

16. दिलवाड़ा मंदिर, माउंट आबू

वास्तुपाल तेजपाल द्वारा 11वी से १३वी शताब्दी में निर्मित दिलवाड़ा मंदिर अरावली पहाड़ियों के बीच स्थित भव्य सुन्दरता को उजागिर करता हैं। नक्काशी के जटिल पत्थरों और संगमर से बना यह मंदिर अपने बनावट के द्वारा चर्चा में हमेशा से रहा है।

माने तो दिलवाडा मंदिर पांच भागो जुडा हुआ है। जैसे भगवान महावीर स्वामी, भगवान ऋषभभो, भगवान पार्श्वनाथ, भगवान आदिनाथ और भगवान नेमिनाथ जी के पड़ाव निम्न हैं। कहा जाता है कि सुन्दरता मनमोहक और जादू से प्रपग्य है जो लोगो को वही रुकने के मजबूर कर देता है। इस मंदिर में आदित्यनाथ के मूर्ति में उनकी दोनों आंखे हीरे की लगी है और मूर्ति के गले में मूल्यवान हार है। वैसे यह एक जैन मंदिर है।

स्थापित देवता-  दिलवाडा
स्थान- राजस्थान,  सिरोही जिले के माउंट आबू
स्थापक- विमल शाह, वास्तुपाल तेजपाल
स्थापित समय- १३वी शताब्दी

17. सूर्य  मंदिर, कोणार्क

सूर्य मंदिर भारत के उड़ीसा राज्य के जगन्नाथ पुरी जिले के कोणार्क नामक शहर के चंद्रभागा नदी के तट पर स्थिति है। सूर्य मंदिर में सूर्य देवता की पूजा होती है। सूर्य मंदिर भारत के दस  सबसे बड़े मंदिरों में से एक है। कलयुग में सूर्य ही एक ऐसे देवता हैं। 

जिनको हम साक्षात् रूप में  देख भी सकते  हैं और इनकी पूजा भी करते हैं या कर सकते हैं। सूर्य भगवान की पूजा रविवार के दिन किया जाता है। सूर्य देवता की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। कहा जाता है कि उगते हुए भगवान् सूर्य की पूजा करने से अत्यंत उन्नतिकारक माना गया है।

सुबह के समय उगते हुए सूर्य के दर्शन करने से शरीर में उत्पन्न बिकार (रोग ) ख़त्म हो जाते हैं और शरीर स्वस्थ हो जात हैं। ज्योतिषों में भगवान् सूर्य देव को सभी ग्रहों में राजा माना गया है। कोणार्क मंदिर विश्व के धरोहर स्थलों में से एक है। सूर्य मंदिर की कल्पना सूर्य के रथ के रूप में की गयी है।

जो बारह जोड़े  विशालकाय पहिएँ लगे हुए हैं। अगर हम इसको एक शब्द में ये कहें कि यह भारत की महत्तम बिभुतिओं में से एक है और यह कहना गलत भी नहीं होगा।सूर्य मंदिर का मुख सूर्य जिस तरफ (पूरब की ओर) से उदित होता है उसी तरफ है। इस मंदिर के तीन प्रधान अंग है देउल (गर्भगृह), जगमोहन (मंडप) और नाटमंड है।  

स्थापित देवता- सूर्य देव  
स्थान- कोणार्क,उड़ीसा  
स्थापक- साम्ब 
स्थापित समय- तेरहवीं (13 वी ) सदी 

18. शनि शिंगणापुर, महाराष्ट्र

हिन्दू धर्म के अनुसार भगवन शनि को शस्त्रों और ग्रहों में एक अलग तरह का महत्व दिया गया है। जिनमे इनका बहुत ही मूल्य योगदान पूजन होता है। भगवान् शनि का एक सुप्रसिद्ध मंदिर महाराष्ट्र के अहमदनगर में स्थित है जिन्हें लोग शनि शिंगणापुर मंदिर के नाम से जानते हैं।

भगवान् शनि शिंगणापुर की मूर्ति 5 फुट 9 इंच ऊँची व 1 फुट 6 इंच चौड़ी है। भगवान शनि शिंगणापुर की मूर्ति संगमरमर के एक बड़े से चबूतरे पर खुले आसमान के नीचे धूप में विराजमान है। तीन हजार जनसँख्या वाले शिंगणापुर ग्राम में किसी भी घर में दरवाजा नहीं है।

यहाँ कभी भी किसी घर में कुंडी अथवा ताले का उपयोग नहीं किया गया है। हिन्दू धर्मो में इसका किसी पर प्रभाव दुर्भाग्य के रूप में माना जाता है। इसलिए लोग शनि को शनिवार के दिन सरसों का तेल अर्पित करते हैं। कहा जाता है इनके दर्शन के बाद वापस आते समय पीछे मुड़कर मूर्ति को नहीं देखना चाहिए।वैसे शनि देव सूर्य देव के पुत्र हैं।

स्थापित देवता- शनि देव  
स्थान- अहमदनगर, महाराष्ट्र  
स्थापक- अज्ञात
स्थापित समय- अज्ञात

19. मीनाक्षी सुन्दरेश्वर मन्दिर, तमिलनाडु

मीनाक्षी सुन्दरेश्वर मन्दिर तमिलनाडु के मदुरैई नदी के दक्षिण भाग पर स्थित है। मीनाक्षी सुन्दरेश्वर मन्दिर को मीनाक्षी अम्मां मन्दिर के नाम से भी जाना जाता है। यह भवान शिव और उनकी भार्या अर्थात उनकी धर्मपत्नी का मंदिर है। वह मंदिर में उनकी आँखे मछली के जैसी हैं मछली से मीनाक्षी का तात्पर्य है, इसीलिए वह मंदिर मीनाक्षी मंदिर से जाना जाता है।

वर्ष 1623 और 1655 के बीच निर्मित इस मंदिर को अद्भुत कलाओ से लोग मोहित हो जाते हैं। कहा जाता है की यह देवी पार्वती के जन्म का पवित्र स्थान है और इससे भगवन शिव ने श्रद्धांजलि देने के निर्मित किया था। यह मंदिर देवी पार्वती के पवित्र स्थानों में मुख्य माना जाता है। इस मंदिर की भव्यता हजारों पर्यटकों को रोजाना यहाँ खीच लाती है।

।। कांची तु कामाक्षी,
मदुरै मिनाक्षी,
दक्षिणे कन्याकुमारी ममः
शक्ति रूपेण भगवती,
नमो नमः नमो नमः।।

स्थापित देवता- सुन्दरेश्वरर (शिव) एवं मीनाक्षी (पार्वती)
स्थान- मदुरैई, तमिलनाडु
स्थापक- पाण्ड्या राजा
स्थापित समय- 17वीं शताब्दी


20. मल्लिकार्जुन स्वामी मंदिर, श्रीशैलम

श्रीशैलम शहर में कृष्णा नदी के तट पर स्थित मल्लिकार्जुन स्वामी मंदिर बहुत ही प्रसिद्ध है। विजय नगर के महाराजा हरिहर राय द्वारा इस मंदिर का निर्माण करवाया गया था। इस को को मानने की भावना को 6वीं शताब्दी से हृद्य्कृत किया गया।

हिन्दू धार्मिक कथानुसार यहाँ निवास करने वाले महर्षि सेडी ने केवल शिव की पूजा किया और देवी पार्वती की नहीं जिससे पार्वती जी ने इन्हें श्राप कि वो आजीवन खड़े रहें। भगवान् शिव ने इस विविधता को देखे हुए ऋषि को एक तीसरा पैर प्रदान किया ताकि उन्हें खड़े होने में कोई तखलीफ़ न हो। नल्लामाला पहाड़ियों पर स्थित इस मंदिर के सभी दीवारों पर इस कथा के गठित होने का चित्र को बनाया गया है।

स्थापित देवता- मल्लिकार्जुन स्वामी (शिव)
स्थान- श्रीशैलम, अंदर प्रदेश 
स्थापक- महाराजा हरिहर राय
स्थापित समय- 6वीं शताब्दी

21. भीमाशंकर मंदिर, पुणे

भीमाशंकर मंदिर भोरगिरि गांव खेड़ से 50 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम पुणे से 110 किलोमीटर दूरी में स्थित है। सह्याद्री पहाड़ियों से घिरा हुआ यह मंदिर भगवान् शिव के १२वे ज्योतिर्लिंग का एक मंदिर है। वन्यजीव और अभयारण्य का पदाधिकार अभी हाल ही के समय में इस मंदिर को प्रदान किया गया है।

13 वीं शताब्दी में इस मंदिर की स्थपाना की गयी थी। यह बस्तुकलाओ और नागा के मशहूर है। 3,250 फीट की ऊंचाई पर स्थित भीमाशंकर मंदिर का शिवलिंग काफी मोटा है। इस मंदिर को मोटेश्वरनाथ के नाम से भी जाना जाता है। 

स्थापित देवता- मोटेश्वरनाथ (शिव)
स्थान- पुणे, महाराष्ट्र
स्थापक- अज्ञात
स्थापित समय- अति प्राचीन

22. प्रेम मंदिर, वृंदावन

विशालकाय और भव्यता से पर्पग्य यजह मंदिर स्नेह की वजह से प्रसिद्ध है। यह मंदिर उत्तर प्रदेश के मधुरा जिले के वृन्दावन नामक स्थान पर है। यह मंदिर ५४ एकड़ में बना है और इसकी ऊँचाई १२५ फुट तथा लम्बाई १२२ फुट और  चौड़ाई ११५ फुट में है। जगद्गुरु कृपालु जी महाराज ने इस मंदिर को सन २००१ में एक धार्मिक स्थल के रूप में बनवाया था।

जिसे राधा कृष्णा और सीता राम को अर्पित किया था। मंदिर के दीवारों और अन्य भागो पर भगवान् श्री कृष्ण के  बचपन के लीलावों का चल चित्र बनाया गया है। जैसे उनका गोवर्धन पर्वत का उठाना, कालिया नाग के साथ अथ्खेलिया करना आदि। इस मंदिर को बनाने में 11 वर्ष लगे थे। जिसमे कुल १५० करोड़ रूपये से अधिक के खर्चे आये थे। इस मंदिर की प्रकाश व्यवस्था ऐसी है कि मानो यहाँ रात में आसमान से सितारे आकर चमकते हैं। यह मंदिर प्यार का एक चिन्ह है।

स्थापित देवता- राधा कृष्ण 
स्थान- वृन्दावन, उत्तर प्रदेश
स्थापक- जगद्गुरु कृपालु जी महाराज
स्थापित समय- २००१ में पूर्ण हुआ

23. त्र्यम्बकेश्वर मन्दिर, नासिक

भगवान् शिव के १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है, यह त्र्यम्बकेश्वर मन्दिर। यह महाराष्ट्र के नासिक में स्थित ब्रह्म गिरि नाम के पर्वत पर गोदावरी नदी के तट पर स्थित है। मराठाओ के तीसरे पेशवा बालाजी अर्थात नाना साहब पेशवा सन १७५५ में ही इस मंदिर की शुभारभ कर दिया गया था।

पूरे ३१ साल बाद जाकर इस मंदिर को सन १७८६ में पूर्ण रूप से निर्मित कर दिया गया। गोदावरी नदी के किनारे बसा यह त्र्यंबकेश्‍वर मंदिर काले- काले पत्थरों से बना है। त्र्यंबकेश्‍वर मंदिर क्लासिक बस्तुलाओं को प्रकाशित करता है। उस समय में इस मंदिर के निर्माण में करीब- करीब १६ लाख रूपये खर्च किये गए थे। जो उस समयानुसार बहुत बड़ा महत्व्कारी रकम था।

त्रिंबक शहर इस पृथ्वी पर स्वर्ग का अनुभव करती है।  यहाँ की यात्रा ज्ञान, स्वतंत्रता और आध्यात्मिकता के भावो की अनुभूति करती है।

स्थापित देवता- त्र्यम्बकेश्वर (शिव)
स्थान- नासिक, महाराष्ट्र
स्थापक- नाना साहब पेशवा
स्थापित समय- 18वीं शताब्दी

24. श्रीनाथजी मंदिर, नाथद्वारा

भगवान् श्री कृष्ण जी के अवतार श्रीनाथ जी का मंदिर राजस्थान के नाथद्वारा नमक जगह पर स्थापित है। मशहूर शहर उदयपुर से 48 किमी की दूरी पर बनास नामक नदी के तट पर स्थापित है। यह मंदिर देवताओ के शृंगार के प्रसिद्ध है। यहाँ मूर्ति को रोजाना अलग- अलग पोषक पहनाये जाते हैं, जिन्हें देख लोग मोहित हो जाते हैं।

इस मंदिर को वृन्दावन के नन्द महाराज के मंदिर को देखते हुए  ठीक उसी प्रकार से बनाया गया है। इस मंदिर को नंदा भवन या नंदालय के नाम से भी जाना जाता है। मंदिर के अन्दर अनेको प्रकार के त्यौहार मनाये जाते हैं जैसे श्री कृष्णा जन्माष्टमी, होली, दीपावली आदि। अगर आप यहाँ यात्रा करने आते हैं तो आप को धरती पर स्वर्ग का अनुभव प्रदान होगा।

स्थापित देवता- श्री कृष्ण 
स्थान- नाथद्वारा, राजस्थान
स्थापक- मेवाड़ के राणा
स्थापित समय- 17वीं शताब्दी

25. महाबोधि मंदिर, बोधगया

भगवान् गौतम बुद्ध ने जहाँ पर आत्मज्ञान प्राप्त किया था। यह मंदिर उसी जगह पर स्थापित को संकेत रूप से संकेत देता है। महाबोधि मंदिर विहार के बोधगया नामक शहर में स्थित है। भगवान् बुद्ध के स्थलों में से यह एक बहुत महत्त्वपूर्ण स्थल है। महाबोधि मंदिर 4।8 हेक्टेयर के क्षेत्रफल में फैला हुआ है जो की ५५ मीटर की लम्बाई में है।

पवित्र बौद्ध विक्षु मंदिर के बाएं तरफ स्थित है यह महाबोधि मंदिर। यहाँ एक वृक्ष है जिसके नीचे भगवान् गौतम बुद्ध ने आत्म शक्ति को जगा कर आत्म ज्ञान प्राप्त किया था। इस मंदिर में इतना शांति और सुगम है सह ही साथ यहाँ की बस्तुकलायें आप को मंत्र्मुग्द्ध कर लेंगी। इस मठ का निर्माण 1934 ई। में हुआ था।

स्थापित देवता- गौतम बुद्ध
स्थान- बोधगया, विहार
स्थापक- अज्ञात
स्थापित समय- 1934 ई०

26. लिंगराज मंदिर, भुवनेश्वर

भगवान् शिव के प्राचीन मंदिरों में से एक है लिंगराज का मंदिर जो भुवनेश्वर नमक शहर में स्थित है। लिंगराज मंदिर को ललाटेडुकेशरी ने 617-657 ई० वी० में निर्मित करवाया था। हिन्दू धार्मिक कथावो की माने तो ‘लिट्टी’ तथा ‘वसा’ नाम के दो भयंकर राक्षसों का देवी पार्वती ने इसी जगह पर किया था।

यही पास में लिंगराज का भव्य मंदिर और विन्दुसागर सरोवर भी स्थित है। इस मंदिर के दीवारों पर भगवान् विष्णु के चित्र भी दर्शित किये गए है। शिवरात्रि के दिन यहाँ लाखो में भीड़ उमड़ती है। लिंगराज मंदिर की शिल्कालायें सम्पूर्ण विश्व में प्रसिद्ध हैं।

स्थापित देवता- शिव
स्थान- भुवनेश्वर, उडीसा
स्थापक- ललाटेडुकेशरी
स्थापित समय- 7वी शताब्दी

27. कामाख्या मंदिर, गुवाहाटी

दिसपुर जो असम की राजधानी है वहां से 7 किलोमीटर की दूरी पर स्थित गुवाहाटी नामक शहर से १० किलोमीटर दूर नीलाचल नाम के पव॑त पर कामाख्या मंदिर विराजमान है। यह देश 51 महाशक्ति पीठों में से एक है जो ४ शक्तिपीठों में मुख्य महत्व रखता है।

कामाख्या मंदिर के देवी को इच्छा के देवी रूप में माना जाता है। तंत्र, मन्त्र और कामाक्षी की भावना पर विश्वास रखने वाले लोग कामाख्या देवी की पूजा करने यहाँ आते हैं। हवा फूक और काली आत्माओं को यहाँ पूजित किया जाता है, जो सदियों से चला आ रहा है। 

स्थापित देवता- कामाख्या
स्थान- गुवाहाटी, असम
स्थापक- म्लेच्छ वंश के राजा, पुनर्निर्माण: राजा नर नारायण
स्थापित समय- 8वीं-17वीं सदी तक

28. ओंकारेश्वर मंदिर, मध्यमहेश्वर

यह मंदिर मध्य प्रदेश के खंडवा जनपद के मध्यमहेश्वर में स्थित है। यह शिवपुरी नाम के एक दीप पर स्थित है जो नर्मदा नदी के मध्य में स्थित है। यह मंदिर ॐ आकार आकलन पर बना हुआ है यहाँ दो मंदिर है जो ॐकारेश्वर और ममलेश्वर हैं।

कहा जाता है की ठंडक के मौसम में मध्यमहेश्वर जो केदारनाथ की मूर्ति है उसे ऊखीमठ में लाया जाता है। 6 माह उस मूर्ति की यही पर होती है और पुन: उसी स्थान पर पंहुचा दिया जाता है। लोगो का ऐसा कहना है की जो यहाँ मन्नत मांगता है वो खाली हाथ वापस नहीं जाता उसकी मनसा जरुर से पुरी होती है। मंदिर के चार दीवारों के अन्दर जो जल है उससे बड़ा ही पवित्र माना है।

स्थापित देवता- शिव
स्थान- खंडवा, मध्य प्रदेश
स्थापक- अज्ञात
स्थापित समय- अज्ञात

नोट- इस पोस्ट को लिखने के लिए पुराणिक किताबों का अध्यन किया गया है तथा गूगल से कुछ जानकारियों को निकला गया है. अगर आप को पोस्ट में कुछ गलत लगे तो हमें बताएं और कमेंट करें. ताकि हम उससे सुधर सकें. और ज्यादा से ज्यादा इस पोस्ट को शेयर करें.

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